24. What Is Cotter in Engineering Drawing - Cotter क्या होती है

WHAT-IS-COTTER-IN-HINDI-ENGINEERING-DRAWING

What is Cotter in Hindi

Cotter shaft के axis के parpenduclar fit की जाती है. Cotter भी key की तरह tampery fastner है. Cotter के अनुसार ही shaft में slote कटे होते है. Cotter rectangular cross section का बना होता है. Cotter की thickness 0.25D व width thickness की 5 गुणा होती है. Cotter मोटाई में एक समान व लम्बाई में tapper होती है. Cotter लम्बाई में straight व एक साइड taper होती है और कभी-कभी दोनों साइड भी taper होती है. Cotter का प्रयोग railway में pistion rod व conecting rod को जोड़ने के लिए किया जाता है.

What is Gib in Hindi

जब दो rod cotter के द्वारा जोड़ी जाती है तो cotter और rod के बीच में घर्षण पैदा होने के कारण cotter के खुलने का भय रहता है. Cotter को खुलने से रोकने के लिए जिस धातु या pice का प्रयोग किया जाता है उसे gib कहते है. Gib thickness or width में बराबर होती है.

Different Between Key And Cotter

 Key

1. key mild steel की rectangular व square cross section में बनी होती है
2. key shaft के axis के parallel fit की जाती है
3. Key का प्रयोग shaft और hub की relative moment को रोकने के लिए किया जाता है.

Cotter

1. Cotter cast iron की  rectangular wedge shape में होती है.
2.Cotter हमेशा shaft के axis के  parpendcular fit की जाती है.
3. Cotter का प्रयोग दो rod की saliding moment को रोकने के लिए किया जाता है.

Different Between Sunk Key And Saddle Key

Sunk Key

1. इस key की bottom surface straight यानी की समान होती है
2.Sunk key आधी shaft और आधी hub में fit की जाती है.

Saddle Key

1. इसकी bottom surface curved surface में होती है.
2. Saddle key हमेशा shaft के उपर ही fit की जाती है.

Joint Used For Connecting Rods

Engineering line में connecting rods को जोड़ने के लिए बहुत से joint प्रयोग किए जाते है. उनमें से कुछ इस प्रकार है.

1. Sleeve And Cotter Joint
2. Spigot And Socket Joint
3. Gib And Cotter Joint
4. Knuckle Joint
5. Adjustable Joint

1. Sleeve And Cotter Joint

यह दो Rods को जोड़ने के लिए प्रयोग किए जाते है इस joint में दो sleeve दो rods व दो cotter प्रयोग की जाती है. sleeve के अंदर rod के Dia.के अनुसार आर-पार hole कता होता है. sleeve में दोनों rods को डालकर उपर से cotter rod के axis के लंबवत fit की जाती है. Cotter की vertical side और sleeve के बीचमें clearance बचता है. यह clearance हम अच्छी fitness व rod की adjustment के लिए छोड़ते है.

2. Spigot And Socket Joint

इस joint में one spigot one socket व cotter होती है. Spigot of Socket cylindrical होती है. व दोनों को अंदर डालने हेतु slote कटा होता है. Spigot of Socket को जोड़ने के बाद slote में cotterफिट कर दी जाती है. इसमें भी अंतर यानी की clearance बचता है जो अच्छी fitness यानी की फिटिग का काम करता है.

3. Gib And Cotter Joint

Gib and cotter joint rectangular व square cross section की rod को जोड़ने के लिए उपयोग किए जाते है. इस joint के लिए एक fork और one rod व gib and cotter उपयोग किया जाता है. Gib and cotter को fit करने के लिए fork and simple rod में slote कटा होता है. सबसे पहले fork में rod को डालकर उपर से cotter fit किया जाता है. अच्छी fitting के लिए इसके बीच में clearance व् छोड़ा जाता है.यह joint heavy workके लिए प्रयोग किया जाता है.

4. Knuckle Joint

इस joint में दो rod को एक pin के द्वारा आपस में जोड़ा जाता है. इसलिए इसे pin joint के द्वारा भी जाना जाता है. यह joint उन दो rod को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है. जो rod दबाव में हो और खिचाव में भी हो, इस joint में rod को एक सीध में रखने की आवस्यकता नहो पड़ती है. इस जॉइंट में rod का प्रयोग one line moment अथवा rotary motion में बदलने के किए जाता है. इस कारण में pistion rod और connecting rod को जोड़ा जाता है. इस joint में निम्नलिखित parts होते है.

1. Double Eye End Or Forked End
2. Single Eye End
3. Cylindrical Pin
4. Collar
5. Taper Pin

इस joint की मुख्य विशेषता निम्नलिखित है.
1. यह rod के बीच महत्वपूर्ण angular moment प्रदान करता है.
2. यह आसानी से जोड़ा व हटाया जा सकता है.
3.यह रेखीय गति को घुमावदार motion में बदलने का अच्छा joint है.

5. Adjustable Joint

इस joint में rods को एक सीध में जोड़ने के लिए use किया जाता है. इस sleeve जिसको couple भी कहा जाता है. इस पर उल्टी व सीधी thread कटी होती है. Rod के सिरों पर भी उल्टी व सीधी thread कटी होती है. Sleeve के बाहर की और भुजाए बनी होती है जिससे sleeve को घुमाया जाता है. एक और घुमाने से दोनों rod sleeve के अंदर घुस जाती है, और इनकी length कम हो जाती है और दूसरी और घुमाने से rod बाहर निकल जाती है तथा लम्बाई बढ़ जाती है.

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